काश कि कुछ अल्फ़ाज़ हमें भी मिल जाए,
बादल फिजा में ज़िन्दगी तस्वीर बन जाए,
जो परिंदे उडें हैं हौसले लिए,
उम्मीद है कि उन्हें काफिलें मिल जाए ।
- R.S
वक़्त है मेरा और घड़ी तेरे हाथ
खुली किताब मेरी और फिर आया एक शाम
जब जिक्र आया तेरा , हसरतें हुई गुलाम
एक सोच लेके तेरी पन्नों को मरहम बनाया फिर से आज
खुद को पतंग किया तेरी ख्वाइशों की डोर में
वो दिन पुराने हो गए नई यादों के साथ
- राहुल श्रीवास्तव