Poets Who Blog
कि कुछ हमसे किनारे ऐसे छूट गए कुछ यार थे जो पुराने रूठ गए
नाराजगी में भी वो हस्ते रहे हम मुस्कुराते रहे इस दोस्ती कि बागबानी को आज भी हम सिचते रहे
तुम सुनो तो बताएं खैरियत अपनी आज भी दिलों पर लिखने का हुनर आता है
- Rahul Srivastava
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